Sunday, July 13, 2014



Award Nite

कल रात सोने से पहले 
कुछ गुस्सा और कुछ हंसी आई 
अपने  लिए  अवार्ड और रिवॉर्ड याद आये 
     बात कुछ यूं  है कि 
     हर किसी  को उसके काम पर 
     अवार्ड दिया जाता है 
हमने भी ख्यालो  में 
"अवार्ड नाईट " सजाई 
             यूं तो अवार्ड हम  लेते नहीं 
             पर लोग हमे गलती से देते भी नहीं 
होता ऐसा है कि कभी  काम वाली बाई छुट्टी मनाये 
तो समझो हमारी शामत आई 
              एक दिन बोल कर लेती हैं मैडम छुट्टी चार 
              पूछो तो कहती है कि पैसे लीजिये काट 
उसकी जगह हमने  जो अपने  जी और जान  जलाये 
काश!  उसके लिए हमें  कोई हिम्मत का रिवॉर्ड  दिया जाये 
               पति करते ऑफिस में काम  5 -10 -15  साल 
               कंपनी देती उन्हें उनकी नौकरी का अवार्ड 
रिवॉर्ड भी मिले उन्हें
हर साल प्रमोशन ,हाईक और बोनस  साथ
जिस  बन्दे को घर से तैयार करके
नौकरी के लिए भेजे  बीवी हर दिन यार
जिसकी सेहत का पूरा  रखे ध्यान
ऑफिस कि बातें सुने और करे साथ-साथ 10  काम
                      ऐसी "unemployed employee " के लिए नहीं कोई "AWARD "
                       हर सुख दुःख कि साथी ,घर को मंदिर बनती
                       हर निर्णीय  में  सोच समझ कर जो देती साथ
                       उस नारी के लिए कोई नहीं "रिवॉर्ड "
पैदा  होने से पहले और बच्चों  के जन्म के बाद
दिया जाता केवल पतियों  और डॉक्टरों  को धन्यवाद
              अगर बच्चा जाये माँ पर
               तो दुनिया निकाले खामियां चार
                यहाँ भी अपनी बारी  नहीं आती है
                जबकि जन्म देते  समय नारी
                मौत  से लड़ कर वापिस आती है.........continue.....

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